LIS Cafe-Asheesh

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मैं जी रहा हुँ अपने ख्वाब के लिये, अपने शोहरत और जज्बात के लिये, और; मेरा दिल धड़कता है अपनों के इंसाफ के लिये, किताबें मेरी हमराज हैं, सम्राट अशोक मेरे आदर्श
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