Garhwali kavita by atul gusain

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हे भुल्ला तु घौर जाणी छै त, हे भुल्ला तु गढ़वाल जाणी छै त, द्वी मेली चाणों की एक मिठे कु डब्बा मेरा घौर भी पौंछे दे। मिली जाली मेरी ब्वे त्वे रस्ता मा छुणख्याळी दथुड़ी होली हाथो मा मुंड मा मुन्यसु अर कुछ्ली गात होली।http://atulgusain.blogspot.in/ http://garhwalikavita.weebly.com/

हे भुल्ला तु घौर जाणी छै त, हे भुल्ला तु गढ़वाल जाणी छै त, द्वी मेली चाणों की एक मिठे कु डब्बा मेरा घौर भी पौंछे दे। मिली जाली मेरी ब्वे त्वे रस्ता मा छुणख्याळी दथुड़ी होली हाथो मा मुंड मा मुन्यसु अर कुछ्ली गात होली।http://atulgusain.blogspot.in/ http://garhwalikavita.weebly.com/

हे भुल्ला तु घौर जाणी छै त, हे भुल्ला तु गढ़वाल जाणी छै त, द्वी मेली चाणों की एक मिठे कु डब्बा मेरा घौर भी पौंछे दे। मिली जाली मेरी ब्वे त्वे रस्ता मा छुणख्याळी दथुड़ी होली हाथो मा मुंड मा मुन्यसु अर कुछ्ली गात होली।http://atulgusain.blogspot.in/ http://garhwalikavita.weebly.com/

हे भुल्ला तु घौर जाणी छै त, हे भुल्ला तु गढ़वाल जाणी छै त, द्वी मेली चाणों की एक मिठे कु डब्बा मेरा घौर भी पौंछे दे। मिली जाली मेरी ब्वे त्वे रस्ता मा छुणख्याळी दथुड़ी होली हाथो मा मुंड मा मुन्यसु अर कुछ्ली गात होली।http://atulgusain.blogspot.in/ http://garhwalikavita.weebly.com/

सर्व शीक्षा अभियान का बोल्ड लगा था। मैंने सोचा यहाँ शीक्षा बांटी जा रही है। अन्दर गया तो देखा वहां दाल भात उडाई जा रही थी। मैंने पूछा क्या बात है मास्टर साहब  खूब घरात खलाई जा रही है, किसी बच्चे का नामकरण है या किसी मैडम की बरात आ रही है। बल आवा आवा गुसाईं जी  दाल भात तुम भी खावा जी ।

सर्व शीक्षा अभियान का बोल्ड लगा था। मैंने सोचा यहाँ शीक्षा बांटी जा रही है। अन्दर गया तो देखा वहां दाल भात उडाई जा रही थी। मैंने पूछा क्या बात है मास्टर साहब खूब घरात खलाई जा रही है, किसी बच्चे का नामकरण है या किसी मैडम की बरात आ रही है। बल आवा आवा गुसाईं जी दाल भात तुम भी खावा जी ।

पश्चमी सभ्यता मा बिगणी गिन तुमरा नौना नौनी

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मेरा गौंऊ मा एक चौरी  चौरी मा पिपळा डाळी  आज बैठी की पिपळा डाळी तैळ  हवा खाणो दिल कनु।  क्वी भुल्ला नवोळा जांदू,  ठण्डू पाणी ले की आन्दू,  आज नवोळा पाणी   पीणा कु दिल कनु।

मेरा गौंऊ मा एक चौरी चौरी मा पिपळा डाळी आज बैठी की पिपळा डाळी तैळ हवा खाणो दिल कनु। क्वी भुल्ला नवोळा जांदू, ठण्डू पाणी ले की आन्दू, आज नवोळा पाणी पीणा कु दिल कनु।

http://atulgusain.blogspot.in/

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http://garhwalikavita.weebly.com/ http://atulgusain.blogspot.in/

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नेगी जी का गीत कुराण छन भुला। ये गढ़भूमी पहाड़ मा पुराण छन भुला।।  नेगी जी का गीत रुवांद छन भुला। देश बटी देवभूमि मा बुलांद छन भुला।। atul gusain

नेगी जी का गीत कुराण छन भुला। ये गढ़भूमी पहाड़ मा पुराण छन भुला।। नेगी जी का गीत रुवांद छन भुला। देश बटी देवभूमि मा बुलांद छन भुला।। atul gusain

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