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Yatharth Geeta - भजन का अधिकार सबको : अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक्। साधुरेव स मन्तव्य: सम्यग्व्यवसितो हि स:।। (गीता, ९/३०) : क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति। कौन्तेय प्रतिजानीहि न मे भक्त: प्रणश्यति।। (गीता, ९/३१)...अत्यन्त दुराचारी भी मेरा भजन करके शीघ्र ही धर्मात्मा हो जाता है एवं सदा रहनेवाली शाश्वत शान्ति को प्राप्त कर लेता है। अत: धर्मात्मा वह है जो एक परमात्मा के प्रति समर्पित है और भजन करने का अधिकार दुराचारी तक को है। Bhagavad Gita

Yatharth Geeta - भजन का अधिकार सबको : अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक्। साधुरेव स मन्तव्य: सम्यग्व्यवसितो हि स:।। (गीता, ९/३०) : क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति। कौन्तेय प्रतिजानीहि न मे भक्त: प्रणश्यति।। (गीता, ९/३१)...अत्यन्त दुराचारी भी मेरा भजन करके शीघ्र ही धर्मात्मा हो जाता है एवं सदा रहनेवाली शाश्वत शान्ति को प्राप्त कर लेता है। अत: धर्मात्मा वह है जो एक परमात्मा के प्रति समर्पित है और भजन करने का अधिकार दुराचारी तक को है। Bhagavad Gita

Ravish Ranjan's blog : Modi's look alike's aura

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