तुम लोग मुझे कहते हो आप की बातें समझ नही आती ......मैं कहता हुं   जो तुमहे समझ आ जाता है उस पर तुम तर्क करने बैठ जाते हो ....ये कैसी समझ है आप लोगो की .....  समझ आ गया मतलब बात खत्म ...अब कोई बात नही इस विषय में ....  अच्छा ही है ...तुमहे मेरी बात समझ नही आती ....क्यूँकी तुमहारी समझ की परिभाषा ही गलत है.........मदारी

तुम लोग मुझे कहते हो आप की बातें समझ नही आती ......मैं कहता हुं जो तुमहे समझ आ जाता है उस पर तुम तर्क करने बैठ जाते हो ....ये कैसी समझ है आप लोगो की ..... समझ आ गया मतलब बात खत्म ...अब कोई बात नही इस विषय में .... अच्छा ही है ...तुमहे मेरी बात समझ नही आती ....क्यूँकी तुमहारी समझ की परिभाषा ही गलत है.........मदारी

मैं तो बोहोत पेहले आ जाता तुमने ही...मित्रता का प्रस्ताव रखने में देरी कर दी .......तुम गुरू खोजते रहे और मैं मित्र ..........मदारी

मैं तो बोहोत पेहले आ जाता तुमने ही...मित्रता का प्रस्ताव रखने में देरी कर दी .......तुम गुरू खोजते रहे और मैं मित्र ..........मदारी

मैं शिश्य हुं ...मेरा ध्यान beginners के लिये नही है....मेरा ध्यान masters के लिये है........मदारी

मैं शिश्य हुं ...मेरा ध्यान beginners के लिये नही है....मेरा ध्यान masters के लिये है........मदारी

आप जिस भी चीज पर प्रतिक्रिया करते है .. वो आप का आनन्द  है...... मदारी

आप जिस भी चीज पर प्रतिक्रिया करते है .. वो आप का आनन्द है...... मदारी

जब दिल चुराया था उनका ...तब तुम कहा थे ... जब रूप चुराया था उनका ..तब तुम कहा थे .. आज उलझते  से दिखते हो जो  शब्दो मे .. जब शिश्य मांगा था गुरू ने ..तब तुन कहाँ थे ......मदारी

जब दिल चुराया था उनका ...तब तुम कहा थे ... जब रूप चुराया था उनका ..तब तुम कहा थे .. आज उलझते से दिखते हो जो शब्दो मे .. जब शिश्य मांगा था गुरू ने ..तब तुन कहाँ थे ......मदारी

तुम मेरी  चाहत के आगे टिक ना पाओगे ......क्यू की मैं भी तुमहारी चाहत के आगे टिक ना सका .......मदारी

तुम मेरी चाहत के आगे टिक ना पाओगे ......क्यू की मैं भी तुमहारी चाहत के आगे टिक ना सका .......मदारी

मेरे सबसे करीब वो है .....जो मेरी एक भी बात नही समझता .....मदारी

मेरे सबसे करीब वो है .....जो मेरी एक भी बात नही समझता .....मदारी

यहां जो भी है तुमहारा प्रिये ही है ....जो प्रिये नही था वो जन्म ही ना ले सका ......मदारी

यहां जो भी है तुमहारा प्रिये ही है ....जो प्रिये नही था वो जन्म ही ना ले सका ......मदारी

जिस जिस पर अंधेरा पडा .... चमक गया ........मदारी

जिस जिस पर अंधेरा पडा .... चमक गया ........मदारी

एक वो औरत प्यार करती थी मुझे ...एक इस औरत से प्यार  करता था मैं ....एक ही ज़िस्म ने दो रूप लिये ......एक माँ बनी दुसरी पत्नी ............मदारी

एक वो औरत प्यार करती थी मुझे ...एक इस औरत से प्यार करता था मैं ....एक ही ज़िस्म ने दो रूप लिये ......एक माँ बनी दुसरी पत्नी ............मदारी

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