संस्कृत श्लोक आणि पाठ

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ऊं बृं बृहस्पतये नम:
सूर्य संवेदना पुष्पे:, दीप्ति कारुण्यगंधने| लब्ध्वा शुभम् नववर्षेअस्मिन् कुर्यात्सर्वस्य मंगलम् || Geeta Quotes, Hindi, Sanskrit Quotes, Hinduism, Hindus, Prayer Quotes, Simple Prayers
सूर्य संवेदना पुष्पे:, दीप्ति कारुण्यगंधने| लब्ध्वा शुभम् नववर्षेअस्मिन् कुर्यात्सर्वस्य मंगलम् ||
ईर्ष्यी घृणी न संतुष्टः क्रोधनो नित्याशङ्कितः। परभाग्योपजीवी च षडेते नित्यदुः खिताः।।  अर्थ: ईर्ष्या करने वाला , घृणा करने वाला , असंतोषी , क्रोधी , सदा संकित रहने वाला और दूसरों के भाग्य पर जीवन-निर्वाह करने वाला – ये छः सदा दुखी रहते हैं। Amigurumi Patterns, Maori Tattoos, Guru Quotes, Sanskrit Language, Sanskrit Words, Buddhism Quote
ईर्ष्यी घृणी न संतुष्टः क्रोधनो नित्याशङ्कितः। परभाग्योपजीवी च षडेते नित्यदुः खिताः।। अर्थ: ईर्ष्या करने वाला , घृणा करने वाला , असंतोषी , क्रोधी , सदा संकित रहने वाला और दूसरों के भाग्य पर जीवन-निर्वाह करने वाला – ये छः सदा दुखी रहते हैं।
शांति Laxmi Mantra, Telugu Poems, Lord Shiva Mantra, Hindu Vedas, Spiritual Figures, Hindu Rituals
शांति
सूर्यनमस्कार ॐ सूर्य आत्मा जगतस्तस्युषश्च आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने। दीर्घमायुर्बलं वीर्यं व्याधि शोक विनाशनम्  सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्॥  ॐ सूर्याय नम: । ॐ आदित्याय नम: । ॐ भास्कराय नम: ।   आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥ Vishnu Mantra, Hindu Mantras, All Mantra, Hindu Philosophy, Vedic Mantras
सूर्यनमस्कार ॐ सूर्य आत्मा जगतस्तस्युषश्च आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने। दीर्घमायुर्बलं वीर्यं व्याधि शोक विनाशनम् सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्॥ ॐ सूर्याय नम: । ॐ आदित्याय नम: । ॐ भास्कराय नम: । आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥
नोद्धतं कुरुते जातु वेषं न पौरुषेणापि विकत्थतेन्यान। न मूर्छित: कटुकान्याह किञ्चित् प्रियं सदा तं कुरुते जानो हि।।  अर्थ: जो कभी उद्यंडका-सा वेष नहीं बनाता, दूसरों के सामने अपने पराक्रम की डींग नही हांकता , क्रोध से व्याकुल होने पर भी कटुवचन नहीं बोलता, उस मनुष्य को लोग सदा ही प्यारा बना लेते हैं। Sanskrit Mantras, Philosophical Thoughts, Daily Mantra
नोद्धतं कुरुते जातु वेषं न पौरुषेणापि विकत्थतेन्यान। न मूर्छित: कटुकान्याह किञ्चित् प्रियं सदा तं कुरुते जानो हि।। अर्थ: जो कभी उद्यंडका-सा वेष नहीं बनाता, दूसरों के सामने अपने पराक्रम की डींग नही हांकता , क्रोध से व्याकुल होने पर भी कटुवचन नहीं बोलता, उस मनुष्य को लोग सदा ही प्यारा बना लेते हैं।
षण्णामात्मनि नित्यानामैश्वर्यं योधिगच्छति। न स पापैः कुतो नर्थैंर्युज्यते विजेतेँद्रियः।।  अर्थ: मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ , मोह , मद तथा मात्सर्य को जो वश में कर लेता है , वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की बात ही क्या है। Shree Krishna, Buddha Quotes Inspirational, Mantra Quotes, Indian Gods
षण्णामात्मनि नित्यानामैश्वर्यं योधिगच्छति। न स पापैः कुतो नर्थैंर्युज्यते विजेतेँद्रियः।। अर्थ: मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ , मोह , मद तथा मात्सर्य को जो वश में कर लेता है , वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की बात ही क्या है।
Om Namah Shivaya Mantra, Surya Namaskar
वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।। एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम। य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।। Krishna Mantra, Saraswati Vandana, Hindu Dharma, Shiva Meditation, Hinduism Quotes
वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।। एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम। य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।
सूर्य कवचम / SURYA  KAWACHAM Guru, Om Namah Shivay, Kundalini, Tantra, Jyotish Astrology, Sanskrit
सूर्य कवचम / SURYA KAWACHAM
अनुबंधानपक्षेत सानुबन्धेषु कर्मसु। सम्प्रधार्य च कुर्वीत न वेगेन समाचरेत्।  अर्थ: किसी प्रयोजन से ��किये गए कर्मों में पहले प्रयोजन को समझ लेना चाहिए। खूब सोच-विचार कर काम करना चाहिए, जल्दबाजी से किसी काम का आरम्भ नहीं करना चाहिए। Centre, Karma, Gita Quotes
अनुबंधानपक्षेत सानुबन्धेषु कर्मसु। सम्प्रधार्य च कुर्वीत न वेगेन समाचरेत्। अर्थ: किसी प्रयोजन से किये गए कर्मों में पहले प्रयोजन को समझ लेना चाहिए। खूब सोच-विचार कर काम करना चाहिए, जल्दबाजी से किसी काम का आरम्भ नहीं करना चाहिए।
प्राप्यापदं न व्यथते कदाचि- दुद्योगमन्विच्छति चाप्रमत्तः। दुःखं च काले सहते महात्मा धुरन्धरस्तस्य जिताः सप्तनाः।।  अर्थ: जो धुरंधर महापुरुष आपत्ति पड़ने पर कभी दुखी नहीं होता, बल्कि सावधानी के साथ उद्योग का आश्रय लेता है तथा समयपर दुःख सहता है, उसके शत्रु तो पराजित ही हैं।
प्राप्यापदं न व्यथते कदाचि- दुद्योगमन्विच्छति चाप्रमत्तः। दुःखं च काले सहते महात्मा धुरन्धरस्तस्य जिताः सप्तनाः।। अर्थ: जो धुरंधर महापुरुष आपत्ति पड़ने पर कभी दुखी नहीं होता, बल्कि सावधानी के साथ उद्योग का आश्रय लेता है तथा समयपर दुःख सहता है, उसके शत्रु तो पराजित ही हैं।
सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम् | वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव संपदः ||  अर्थात् : अचानक ( आवेश में आ कर बिना सोचे समझे ) कोई कार्य नहीं करना चाहिए कयोंकि विवेकशून्यता सबसे बड़ी विपत्तियों का घर होती है | ( इसके विपरीत ) जो व्यक्ति सोच –समझकर कार्य करता है ; गुणों से आकृष्ट होने वाली माँ लक्ष्मी स्वयं ही उसका चुनाव कर लेती है |
सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम् | वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव संपदः || अर्थात् : अचानक ( आवेश में आ कर बिना सोचे समझे ) कोई कार्य नहीं करना चाहिए कयोंकि विवेकशून्यता सबसे बड़ी विपत्तियों का घर होती है | ( इसके विपरीत ) जो व्यक्ति सोच –समझकर कार्य करता है ; गुणों से आकृष्ट होने वाली माँ लक्ष्मी स्वयं ही उसका चुनाव कर लेती है |
अयं निजः परो वेति गणना लघु चेतसाम् | उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् |  अर्थात् : यह मेरा है ,यह उसका है ; ऐसी सोच संकुचित चित्त वाले व्यक्तियों की होती है; इसके विपरीत उदारचरित वाले लोगों के लिए तो यह सम्पूर्ण धरती ही एक परिवार जैसी होती है | Indian Quotes
अयं निजः परो वेति गणना लघु चेतसाम् | उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् | अर्थात् : यह मेरा है ,यह उसका है ; ऐसी सोच संकुचित चित्त वाले व्यक्तियों की होती है; इसके विपरीत उदारचरित वाले लोगों के लिए तो यह सम्पूर्ण धरती ही एक परिवार जैसी होती है |