Mriedul
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जन्नत के खयाल से

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जो अक्ली इक्कठे होते हैं

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क्यों कब कहाँ कैसे

क्यों कब कहाँ कैसे

आ मिल फिर वहीं

आ मिल फिर वहीं

अबकी बसंत मरम्त कराई है

अबकी बसंत मरम्त कराई है

खुद तो बसा के घर

खुद तो बसा के घर