Hare Krishna, Hare Rama Nitin

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INDIA
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5 FAST FACTS Why the JEWS Rejected JESUS CHRIST as the MESSIAH !!!

Speaking of Jesus Christ, John says, "He came to His own and His own did not receive Him." Many Christians are confused as to why the Jews rejected Jesu.

KRISHNA GOVINDA by VISHNU108

You are the Original Person. Your body is sat cid ananda vigrahah: full of being, bliss, knowledge and eternality. (Krsna Book, p.

इससे भी गहरी बात जो पता चली है, यह कि एक वृक्ष के पास बैठ कर तुम एक कबूतर को मरोड़ कर मार डालों, तो वृक्ष कंप जाता है। जैसे कबूतरों से भी बड़ा जोड़ है। जैसे सारी चीजें जुड़ी है संयुक्‍त है।         होना भी ऐसा ही चाहिए, क्‍योंकि हम एक ही आस्‍तित्‍व की तरंग है। सागर तो एक है, हम उसकी ही लहरें है। एक लहर वृक्ष बन गई एक लहर पशु बन गई, एक लहर मनुष्‍य बन गई। लेकिन हम सब भीतर जुड़े हुए है।

इससे भी गहरी बात जो पता चली है, यह कि एक वृक्ष के पास बैठ कर तुम एक कबूतर को मरोड़ कर मार डालों, तो वृक्ष कंप जाता है। जैसे कबूतरों से भी बड़ा जोड़ है। जैसे सारी चीजें जुड़ी है संयुक्‍त है। होना भी ऐसा ही चाहिए, क्‍योंकि हम एक ही आस्‍तित्‍व की तरंग है। सागर तो एक है, हम उसकी ही लहरें है। एक लहर वृक्ष बन गई एक लहर पशु बन गई, एक लहर मनुष्‍य बन गई। लेकिन हम सब भीतर जुड़े हुए है।

यह तो बड़ी हैरानी की बात है। इसका मतलब यह हुआ की तुम्‍हारे भीतर जो काटने का भाव है, वह वृक्ष को संवादित हो जाता है। फिर जिस आदमी ने वृक्ष काटे है पहले, वह बिना कुल्‍हाड़ी के भी निकलता है तो वृक्ष कंप जाता है। क्‍योंकि उसकी दुष्‍टता जाहिर है। उसकी दुश्‍मनी जाहिर है।        लेकिन जिस आदमी ने कभी वृक्ष नहीं काटे है, पानी दिया है पौधों को जब वह पास से आता है तो वृक्ष प्रफुल्‍लता से भर जाता है। उसके भी ग्राफ बन जाते है। कि वह कब प्रफुल्‍ल है, कब प्रसन्‍न है कब परेशान है, भय भीत है।        और…

यह तो बड़ी हैरानी की बात है। इसका मतलब यह हुआ की तुम्‍हारे भीतर जो काटने का भाव है, वह वृक्ष को संवादित हो जाता है। फिर जिस आदमी ने वृक्ष काटे है पहले, वह बिना कुल्‍हाड़ी के भी निकलता है तो वृक्ष कंप जाता है। क्‍योंकि उसकी दुष्‍टता जाहिर है। उसकी दुश्‍मनी जाहिर है। लेकिन जिस आदमी ने कभी वृक्ष नहीं काटे है, पानी दिया है पौधों को जब वह पास से आता है तो वृक्ष प्रफुल्‍लता से भर जाता है। उसके भी ग्राफ बन जाते है। कि वह कब प्रफुल्‍ल है, कब प्रसन्‍न है कब परेशान है, भय भीत है। और…

तो तुम अगर वृक्ष के पास जाओ कुल्‍हाड़ी लेकिर तो तुम्‍हें कुल्‍हाड़ी लेकिर आता देखकर वृक्ष कंप जाता है। अगर तुम मारने के विचार से जा रहे हो, वृक्ष को काटने के विचार से जा रहे हो तो बहुत भयभीत हो जाता है। अब तो यंत्र है जो तार से खबर दे देते है। नीचे ग्राफ बन जाता है। की वृक्ष कांप रहा है कि नहीं। घबड़ा रहा है, बेचैन हो रहा है, तुम्‍हें कुल्‍हाड़ी लिए आता देख कर। लेकिन अगर तुम कुल्‍हाड़ी लेकर जा रहे हो, और आप का काटने का कोई इरादा नहीं है। कोई विचार नहीं है मन में। सिर्फ गुजर रहे हो वहां से तो…

तो तुम अगर वृक्ष के पास जाओ कुल्‍हाड़ी लेकिर तो तुम्‍हें कुल्‍हाड़ी लेकिर आता देखकर वृक्ष कंप जाता है। अगर तुम मारने के विचार से जा रहे हो, वृक्ष को काटने के विचार से जा रहे हो तो बहुत भयभीत हो जाता है। अब तो यंत्र है जो तार से खबर दे देते है। नीचे ग्राफ बन जाता है। की वृक्ष कांप रहा है कि नहीं। घबड़ा रहा है, बेचैन हो रहा है, तुम्‍हें कुल्‍हाड़ी लिए आता देख कर। लेकिन अगर तुम कुल्‍हाड़ी लेकर जा रहे हो, और आप का काटने का कोई इरादा नहीं है। कोई विचार नहीं है मन में। सिर्फ गुजर रहे हो वहां से तो…

अभी अमरीका में फिर पुन: एक नया उद्भव हुआ, आकस्‍मिक हुआ। दुनिया की बहुत सी खोजें आकस्‍मिक हुई है। जो वैज्ञानिक काम कर रहा था वह किसी और दृष्‍टि से काम कर रहा था। लेकिन खोज में उसको यह अनुभव हुआ कि वृक्षों में कुछ संवेदनाएं मालूम होती है। तो उसने वृक्षों में महीन तार जोड़े और यंत्र बनाए देखने के लिए कि वृक्ष भी कुछ अनुभव करते है।

अभी अमरीका में फिर पुन: एक नया उद्भव हुआ, आकस्‍मिक हुआ। दुनिया की बहुत सी खोजें आकस्‍मिक हुई है। जो वैज्ञानिक काम कर रहा था वह किसी और दृष्‍टि से काम कर रहा था। लेकिन खोज में उसको यह अनुभव हुआ कि वृक्षों में कुछ संवेदनाएं मालूम होती है। तो उसने वृक्षों में महीन तार जोड़े और यंत्र बनाए देखने के लिए कि वृक्ष भी कुछ अनुभव करते है।