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14. चौदहवां अध्याय | चाणक्य नीति| Chanakya Neeti Fourteenth Chapter

महान आचर्य चाणक्य ( THE GREAT INDIAN ACHARYA)
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If you wish to gain control of the world by the performance of a single deed, then keep the following fifteen, which are prone to wander here and there, from getting the upper hand of you: the five sense objects (objects of sight, sound, smell, taste, and touch); the five sense organs (ears, eyes, nose, tongue and skin) and organs of activity (hands, legs, mouth, genitals and anus).

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हम इनके साथ बहुत सावधानी से पेश आये.. १. अग्नि २. पानी ३. औरत ४. मुर्ख ५. साप ६. राज परिवार के सदस्य. जब जब हम इनके संपर्क में आते है. क्योकि ये हमें एक झटके में मौत तक पंहुचा सकते है. We should always deal cautiously with fire, water, women, foolish people, serpents, and members of a royal family; for they may, when the occasion presents itself, at once bring about our death.

कोकिल तब तक मौन रहते है. जबतक वो मीठा गाने की क़ाबलियत हासिल नहीं कर लेते और सबको आनंद नहीं पंहुचा सकते. The cuckoos remain silent for a long time (for several seasons) until they are able to sing sweetly (in the Spring ) so as to give joy to all.

A wise man should not divulge the formula of a medicine which he has well prepared; an act of charity which he has performed; domestic conflicts; private affairs with his wife; poorly prepared food he may have been offered; or slang he may have heard.

जो व्यक्ति बुद्धिमान है वह निम्न लिखित बाते किसी को ना बताये... वह औषधि उसने कैसे बनायीं जो अच्छा काम कर रही है. वह परोपकार जो उसने किया. उसके घर के झगडे. उसकी उसके पत्नी के साथ होने वाली व्यक्तिगत बाते. उसने जो ठीक से न पका हुआ खाना खाया. जो गालिया उसने सुनी.

एक ही वस्तु देखने वालो की योग्यता के अनुरूप बिलग बिलग दिखती है. तप करने वाले में वस्तु को देखकर कोई कामना नहीं जागती. लम्पट आदमी को हर वास्तु में स्त्री दिखती है. कुत्ते को हर वस्तु में मांस दिखता है. One single object (a woman) appears in three different ways: to the man who practices austerity it appears as a corpse, to the sensual it appears as a woman, and to the dogs as a lump of flesh.

वही पंडित है जो वही बात बोलता है जो प्रसंग के अनुरूप हो. जो अपनी शक्ति के अनुरूप दुसरो की प्रेम से सेवा करता है. जिसे अपने क्रोध की मर्यादा का पता है. He is a pandit (man of knowledge) who speaks what is suitable to the occasion, who renders loving service according to his ability, and who knows the limits of his anger.

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कुसंग का त्याग करे और संत जानो से मेलजोल बढाए. दिन और रात गुणों का संपादन करे. उसपर हमेशा चिंतन करे जो शाश्वत है और जो अनित्य है उसे भूल जाए. Eschew (Avoid) wicked company and associate with saintly persons. Acquire virtue day and night, and always meditate on that which is eternal forgetting that which is temporary.

यदि आप दुनिया को एक काम करके जितना चाहते हो तो इन पंधरा को अपने काबू में रखो. इन्हें इधर उधर ना भागने दे. पांच इन्द्रियों के विषय १. जो दिखाई देता है २. जो सुनाई देता है ३. जिसकी गंध आती है ४. जिसका स्वाद आता है. ५. जिसका स्पर्श होता है. पांच इन्द्रिय १. आँख २. कान ३. नाक ४. जिव्हा ५. त्वचा पांच कर्मेन्द्रिय १. हाथ २. पाँव ३. मुह ४. जननेंद्रिय ५. गुदा

वही व्यक्ति जीवित है जो गुणवान है और पुण्यवान है. लेकिन जिसके पास धर्म और गुण नहीं उसे क्या शुभ कामना दी जा सकती है. He should be considered to be living who is virtuous and pious, but the life of a man who is destitute of religion and virtues is void of any blessing.