Pawan Verma
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भारतीय मनोविज्ञान Vs फ्रायड(पाश्चात्य) मनोविज्ञान | ojaswiyuvashaktidal

भारतीय मनोविज्ञान Vs फ्रायड(पाश्चात्य) मनोविज्ञान | ojaswiyuvashaktidal

भारतीय मनोविज्ञान Vs फ्रायड(पाश्चात्य) मनोविज्ञान जब पश्चिम के देशों में ज्ञान-विज्ञान का विकास प्रारम्भ भी नहीं हुआ था और मानव ने संस्कृति के क्षेत्र में प्रवेश भी नहीं किया था उस समय भारतवर्ष के ...

भारतीय मनोविज्ञान Vs फ्रायड(पाश्चात्य) मनोविज्ञान जब पश्चिम के देशों में ज्ञान-विज्ञान का विकास प्रारम्भ भी नहीं हुआ था और मानव ने संस्कृति के क्षेत्र में प्रवेश भी नहीं किया था उस समय भारतवर्ष के ...

पूज्य बापूजी का ज्योतिर्मय सन्देश | The Greatest Defender Of Humanity

Sant Shri Asharamji Bapu satsang 8 Jan 2012 Delhi Part

बल ही जीवन है। दुर्बलता ही मृत्यु है। | akhilbharatiyhinduektamunch

बल ही जीवन है। दुर्बलता ही मृत्यु है। | akhilbharatiyhinduektamunch

बल ही जीवन है। दुर्बलता ही मृत्यु है। अखो कहे अंधारो कूवो, झगड़ो मटाड़ी कोई न मूंओ। जगत का सब निपटाकर, आज तक कोई शांति से मरा नहीं है। 'सब निपटाकर, सब व्यवस्थित करके, अनुकलता करके फिर भजन करेंगे......

बल ही जीवन है। दुर्बलता ही मृत्यु है। अखो कहे अंधारो कूवो, झगड़ो मटाड़ी कोई न मूंओ। जगत का सब निपटाकर, आज तक कोई शांति से मरा नहीं है। 'सब निपटाकर, सब व्यवस्थित करके, अनुकलता करके फिर भजन करेंगे......

hindu,manch,bharatiya,

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vidyarthivikassansthan

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वास्तविक सौन्दर्य | divya vibhuti maa bharati shri ji

वास्तविक सौन्दर्य | divya vibhuti maa bharati shri ji

सौन्दर्य सबके जीवन की माँग है। वास्तविक सौन्दर्य उसे नहीं कहते जो आकर चला जाये। जो कभी क्षीण हो जाये, नष्ट हो जाये वह सौन्दर्य नहीं है। संसारी लोग जिसे सौन्दर्य बोलते हैं वह हाड़-मांस का सौन्दर्य...

सौन्दर्य सबके जीवन की माँग है। वास्तविक सौन्दर्य उसे नहीं कहते जो आकर चला जाये। जो कभी क्षीण हो जाये, नष्ट हो जाये वह सौन्दर्य नहीं है। संसारी लोग जिसे सौन्दर्य बोलते हैं वह हाड़-मांस का सौन्दर्य...

साधक यदि अभ्यास  के मार्ग पर उसी प्रकार आगे बढ़ता जाये, जिस प्रकार प्रारम्भ में इस मार्ग पर चलने के लिए उत्साहपूर्वक कदम रखा था, तो आयुरूपीसूर्य अस्त होने से पहले जीवनरूपी दिन रहते ही अवश्य 'सोऽहम् ...

साधक यदि अभ्यास के मार्ग पर उसी प्रकार आगे बढ़ता जाये, जिस प्रकार प्रारम्भ में इस मार्ग पर चलने के लिए उत्साहपूर्वक कदम रखा था, तो आयुरूपीसूर्य अस्त होने से पहले जीवनरूपी दिन रहते ही अवश्य 'सोऽहम् ...