Pawan Varma
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वैलेंटाइन डे के सही अर्थ को न ले के आज……? |

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गृहस्थ जीवन की शोभा | divya vibhuti maa bharati shri ji

गृहस्थ जीवन की शोभा | divya vibhuti maa bharati shri ji

"संयोजक ने भूल से एक सच्ची बात कह दी। सचमुच, कस्तूरबा हमारी 'माँ' के समान ही हैं। मैं इनको आदर देता हूँ।" महात्मा गाँधी और उनकी पत्नी कस्तूरा का दाम्पत्य-प्रेम विषय-वासना से प्रेरित न होकर एक आदर्श...

"संयोजक ने भूल से एक सच्ची बात कह दी। सचमुच, कस्तूरबा हमारी 'माँ' के समान ही हैं। मैं इनको आदर देता हूँ।" महात्मा गाँधी और उनकी पत्नी कस्तूरा का दाम्पत्य-प्रेम विषय-वासना से प्रेरित न होकर एक आदर्श...

"हाँ वह आता है, परंतु उसे मेरे मकान के बाहर ही खड़े रहना पड़ता है क्योंकि वह मुझे कभी खाली ही नहीं पाता।" स्वामी दयानंद का ब्रह्मचर्य बल बड़ा अदभुत था। वे शरीर से हृष्ट-पुष्ट, स्पष्टभाषी एवं निडर व...

"हाँ वह आता है, परंतु उसे मेरे मकान के बाहर ही खड़े रहना पड़ता है क्योंकि वह मुझे कभी खाली ही नहीं पाता।" स्वामी दयानंद का ब्रह्मचर्य बल बड़ा अदभुत था। वे शरीर से हृष्ट-पुष्ट, स्पष्टभाषी एवं निडर व...

विदेश के बड़े-बड़े विद्वान एवं वैज्ञानिक भारत में प्रचलित गुरु समक्ष साधक के साष्टांग दण्डवत प्रणाम की प्रथा को पहले समझ न पाते थे कि भारत में ऎसी प्रथा क्यों है । अब बड़े-बड़े प्रयोगों के द्वारा उनकी ...

विदेश के बड़े-बड़े विद्वान एवं वैज्ञानिक भारत में प्रचलित गुरु समक्ष साधक के साष्टांग दण्डवत प्रणाम की प्रथा को पहले समझ न पाते थे कि भारत में ऎसी प्रथा क्यों है । अब बड़े-बड़े प्रयोगों के द्वारा उनकी ...

निर्भयता का रहस्य |

निर्भयता का रहस्य |

nirbhayata ka rahasya "हाँ वह आता है, परंतु उसे मेरे मकान के बाहर ही खड़े रहना पड़ता है क्योंकि वह मुझे कभी खाली ही नहीं पाता।" स्वामी दयानंद का ब्रह्मचर्य बल बड़ा अदभुत था। वे शरीर से हृष्ट-पुष्ट,...

nirbhayata ka rahasya "हाँ वह आता है, परंतु उसे मेरे मकान के बाहर ही खड़े रहना पड़ता है क्योंकि वह मुझे कभी खाली ही नहीं पाता।" स्वामी दयानंद का ब्रह्मचर्य बल बड़ा अदभुत था। वे शरीर से हृष्ट-पुष्ट,...

Aaj Param Anand Mila : Matru Pitru Pujan Divas

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Matri-Pitri Pujan Diwas(BKC Mumbai)

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अनादिकाल से महापुरुषों ने अपने जीवन में माता-पिता और सदगुरु का आदर-सम्मान किया है। पूज्य बापू जी ने भी बाल्यकाल से ही अपने माता-पिता की सेवा की और उनसे ये आशीर्वाद प्राप्त कियेः पुत्र तुम्हारा जगत,...

अनादिकाल से महापुरुषों ने अपने जीवन में माता-पिता और सदगुरु का आदर-सम्मान किया है। पूज्य बापू जी ने भी बाल्यकाल से ही अपने माता-पिता की सेवा की और उनसे ये आशीर्वाद प्राप्त कियेः पुत्र तुम्हारा जगत,...