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कुछ+तो+ऐसा+है+जो+छूटता+नहीं+ घोर+निराशाओं+में+भी+टूटता+नहीं.+

कुछ तो ऐसा है -------

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बेजुबान+पशुओं+से+लेकर+परिंदो+तक+सब+के+जीवन+का+आधार+जल+है,+फिर+प्रश्न+उठना+सहज+और+स्वाभाविक+है+कि+इस+जल+का+अधिकारी+कौन+है,+और+अगर+इसका+उत्तर+यह+है+की+मनुष्य.+तो+फिर+मनुष्य+क्यों+इनका+दोहन+इतनी+तेजी+से+कर+रहा+है?+क्या+वह+इसके+महत्व+को+भूल+गया+है?+या+इतना+सुलभ+होने+के+कारण+कभी+इस+पर+ध्यान+ही+नहीं+दिया.+किन्तु+अब+इसके+महत्व+को+मनुष्य+ने+नज़रअंदाज़+किया+तो+उसके+खुद+के+अस्तित्व+पर+प्रश्नचिन्ह+लगेगा.---------

जल प्रबंधन

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एक+व्यक्ति+सड़क+के+किनारे-+किनारे+जा+रहा+था.+अचानक+उसने+हाथिओ+का+एक+झुण्ड+देखा+जो+कि+पतली-पतली+रस्सियों+से+बधा+हुआ+था.+उसे+बड़ा+आश्चर्य+हुआ+कि+धरती+पर+रहने+वाला+इतना+विशालकाय+जानवर+भला+इतनी+पतली+रस्सी+से+कैसे+बधा+रह+सकता+है,------

क्योकि आप इंसान है !

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एक+चरवाहा+जंगल+गाय+चराने+जाया+करता+था.गाय+लेकर+जाना+और+उन्हें+लेकर+आना+ही+उसकी+दिनचर्या+हुआ+करती+थी.+...................

झूठ का फल

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रात+का+समय+था.+गुरुदेव+रवीन्द्रनाथ+टैगोर+सौंदर्य+शास्त्र+की+एक+पुस्तक+पढ़+रहे+थे.+वो+ये+जानना+चाहते+थे+की+सौंदर्य+का+रहस्य+क्या+है-

शब्द और अनुभूति

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उनके+भजन+और+उपदेश+आज+भी+सारी+मानव+जाति+के+लिए+प्रेरक+है.ये+उनके+ज्ञान+और+भक्ति+का+प्रभाव+ही+था+कि+मीराबाई+उन्हें+अपना+आधात्मिक+गुरु+मानती+थी

आप सब को संत रविदास जयंती की हार्दिक शुभकामनाये!

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हमें++अपनी++कई++समस्याओ++++का+++समाधान++इस+लिए+++नहीं++दिखाई++देता++की+++हम++उनका++हल++एक++सीमित+क्षेत्र++में+ही++पाना++चाहते++है.

वर्तमान परिस्थितियों में वैश्वीकरण के सामाजिक मायने

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क्योंकि आप इंसान हैं !

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