परोपकार से अभिप्राय दूसरो पर स्वार्थरहित उपकार से है. जीवन में हर व्यक्ति अपने प्रति उपकार की आशा तो करता है किन्तु वह परोपकार के लिए प्रेरित नहीं होता.  कोई भी कार्य जब बिना स्वार्थ के किया जाता है तो उसमे बदले की अपेक्षा नहीं होती और  वह  हमें आन्दित करता है.

परोपकार से अभिप्राय दूसरो पर स्वार्थरहित उपकार से है. जीवन में हर व्यक्ति अपने प्रति उपकार की आशा तो करता है किन्तु वह परोपकार के लिए प्रेरित नहीं होता. कोई भी कार्य जब बिना स्वार्थ के किया जाता है तो उसमे बदले की अपेक्षा नहीं होती और वह हमें आन्दित करता है.

गणतंत्र सदभावना

गणतंत्र सदभावना

खुद  वो बदलाव  बनिए  जो आप  समाज में  देखना  चाहते  है-राष्ट्रपिता  महात्मा  गांधी    कहानी बदलाव एक बुजुर्ग  व्यक्ति  नदी  के  किनारे  काफी  निराश  हो  कर  बैठा  था . कुछ  बच्चे  वहाँ  खेल  रहे  थे  तभी  एक   बच्चा  बोला – “दादा  जी  आप  इतने  निराश  क्यों  बैठे  है,  दादा जी  ने  कहा – “कोई  बात  नहीं  है बेटा  तुम  खेलो” . तभी  उस  बच्चे ने  कहा – “बताइये  न  दादा जी   बात  क्या  है ?”.

खुद वो बदलाव बनिए जो आप समाज में देखना चाहते है-राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहानी बदलाव एक बुजुर्ग व्यक्ति नदी के किनारे काफी निराश हो कर बैठा था . कुछ बच्चे वहाँ खेल रहे थे तभी एक बच्चा बोला – “दादा जी आप इतने निराश क्यों बैठे है, दादा जी ने कहा – “कोई बात नहीं है बेटा तुम खेलो” . तभी उस बच्चे ने कहा – “बताइये न दादा जी बात क्या है ?”.

माँ  के  आँचल  के  छोर को  थामे  हुए,  रेत  से  महलो  को  बनाता  हुआ,  मिटटी के खिलोनो  से  खेलता हुआ  पेड़ों की छाव  में  झूमता हुआ ‘ बचपन ‘

माँ के आँचल के छोर को थामे हुए, रेत से महलो को बनाता हुआ, मिटटी के खिलोनो से खेलता हुआ पेड़ों की छाव में झूमता हुआ ‘ बचपन ‘

कुछ+तो+ऐसा+है+जो+छूटता+नहीं+ घोर+निराशाओं+में+भी+टूटता+नहीं.+

कुछ+तो+ऐसा+है+जो+छूटता+नहीं+ घोर+निराशाओं+में+भी+टूटता+नहीं.+

हमें++अपनी++कई++समस्याओ++++का+++समाधान++इस+लिए+++नहीं++दिखाई++देता++की+++हम++उनका++हल++एक++सीमित+क्षेत्र++में+ही++पाना++चाहते++है.

हमें++अपनी++कई++समस्याओ++++का+++समाधान++इस+लिए+++नहीं++दिखाई++देता++की+++हम++उनका++हल++एक++सीमित+क्षेत्र++में+ही++पाना++चाहते++है.

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