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http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/10/30-2012.html   पब्लिक के वोटों पर खुलकर डकैती डालने वाले दस्‍यु।  गुजरे जमाने के सुल्‍तान।  एक सेब का सेवन डॉक्‍टरों को दूर रखता है लेकिन उनका धंधा करने से पौष्टिकता नहीं मिला करती।धन मिलता है और धनवेदना में इजाफा होता है।फल को कुफल बनाने की चेष्‍टा करने वाले पब्लिक तेरा और तेरे हिमायतियों का भरपूर गुणगान करेगी। कैमरों से पंगा ले रहो हो, मालूम नहीं है कि नई टैक्‍नीक वाले कैमरे आपके वस्‍त्रसहित चित्रों को वस्‍त्रविहीन कर देंगे और नहला देंगे…

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/10/30-2012.html पब्लिक के वोटों पर खुलकर डकैती डालने वाले दस्‍यु। गुजरे जमाने के सुल्‍तान। एक सेब का सेवन डॉक्‍टरों को दूर रखता है लेकिन उनका धंधा करने से पौष्टिकता नहीं मिला करती।धन मिलता है और धनवेदना में इजाफा होता है।फल को कुफल बनाने की चेष्‍टा करने वाले पब्लिक तेरा और तेरे हिमायतियों का भरपूर गुणगान करेगी। कैमरों से पंगा ले रहो हो, मालूम नहीं है कि नई टैक्‍नीक वाले कैमरे आपके वस्‍त्रसहित चित्रों को वस्‍त्रविहीन कर देंगे और नहला देंगे…

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/10/2012_19.html    लिंक पर क्लिक करके 'अभिव्‍यक्ति के विकास का जीवंत दौर' पढ़ने के लिए धीरज और समय दोनों चाहिए।

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प्‍यार का मौसम : दैनिक जागरण 15 फरवरी 2013 स्‍तंभ 'फिर' से' में प्रकाशित  http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2013/02/15-2013.html  पब्लिक के लिए अच्‍छा वेलेंटाइन वह होता है जिस दिन उस पर कोई कर न लगे, उसके कर खुले रहें, खुले में रहें। 362 करोड़ की इटालियन वासंती छटा हेलीकॉप्‍टर सौदे के खाते में खाते -खाते बदहजमी कर गई है। इस बार सिर्फ मोदी को ही गोदी में बैठाकर वेलेंटाइन मनाने की आजादी मिलनी चाहिए – क्‍या किसी को इस बात पर भी एतराज़ है ? नैनों में सपना

प्‍यार का मौसम : दैनिक जागरण 15 फरवरी 2013 स्‍तंभ 'फिर' से' में प्रकाशित http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2013/02/15-2013.html पब्लिक के लिए अच्‍छा वेलेंटाइन वह होता है जिस दिन उस पर कोई कर न लगे, उसके कर खुले रहें, खुले में रहें। 362 करोड़ की इटालियन वासंती छटा हेलीकॉप्‍टर सौदे के खाते में खाते -खाते बदहजमी कर गई है। इस बार सिर्फ मोदी को ही गोदी में बैठाकर वेलेंटाइन मनाने की आजादी मिलनी चाहिए – क्‍या किसी को इस बात पर भी एतराज़ है ? नैनों में सपना

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/10/21-2012.html

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http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/10/2-2012_2.html    गांधी जी की पत्रकारिता सामाजिक सरोकारों की रही

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/10/2-2012_2.html गांधी जी की पत्रकारिता सामाजिक सरोकारों की रही

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/11/2012.html  पाखी के पास पहुंच गई है 'व्‍यंग्‍य का शून्‍यकाल'

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http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2013/02/11-2013.html  गरीबी की पहचान : डीएलए दैनिक में 11 फरवरी 2013 में प्रकाशित    मोबाइल होना अमीरी की पहचान है किंतु मिस काल करना गरीबी की नई पहचान है। गरीबी नियोजित और सुनियोजित होने लगी है। जिसकी गरीबी प्रायोजित हो जाती है, वह समझ लेता है कि अब वह असली गरीब हो गया है। गरीबी एक महिला है, वह महिला होते हुए भी सुरक्षित नहीं है। बस में बैठकर भी वह असुरक्षित इसलिए है क्‍योंकि बस में पुरुष है।

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2013/02/11-2013.html गरीबी की पहचान : डीएलए दैनिक में 11 फरवरी 2013 में प्रकाशित मोबाइल होना अमीरी की पहचान है किंतु मिस काल करना गरीबी की नई पहचान है। गरीबी नियोजित और सुनियोजित होने लगी है। जिसकी गरीबी प्रायोजित हो जाती है, वह समझ लेता है कि अब वह असली गरीब हो गया है। गरीबी एक महिला है, वह महिला होते हुए भी सुरक्षित नहीं है। बस में बैठकर भी वह असुरक्षित इसलिए है क्‍योंकि बस में पुरुष है।

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/09/18-2012_5114.html  संगीत के कच्‍चे-पक्‍के और पुख्‍ता रागों की जानकारी यूं तो स‍भी को होती है और  आजकल समाज में एक नए ‘राग भिड़ासी’ की उत्‍पत्ति हुई है। इस राग में कारों के निरंतर बजने वाले हॉर्न और जोर-जोर से आती चिल्‍लाहटों से मधुरता आती है। यूं तो इससे सभी परिचित हैं किंतु मेट्रो शहरों में इसके मुक्‍तभोगियों की संख्‍या में तेजी से इजाफा हुआ है। इसके गाने-बजाने के संबंध में कोई तय समय नहीं है।

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/09/18-2012_5114.html संगीत के कच्‍चे-पक्‍के और पुख्‍ता रागों की जानकारी यूं तो स‍भी को होती है और आजकल समाज में एक नए ‘राग भिड़ासी’ की उत्‍पत्ति हुई है। इस राग में कारों के निरंतर बजने वाले हॉर्न और जोर-जोर से आती चिल्‍लाहटों से मधुरता आती है। यूं तो इससे सभी परिचित हैं किंतु मेट्रो शहरों में इसके मुक्‍तभोगियों की संख्‍या में तेजी से इजाफा हुआ है। इसके गाने-बजाने के संबंध में कोई तय समय नहीं है।

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/10/2012.html   अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी ब्‍लॉगर सम्‍मेलन की खबर लीगेसी इंडिया मासिक पत्रिका अक्‍टूबर 2012 अंक में

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/10/2012.html अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी ब्‍लॉगर सम्‍मेलन की खबर लीगेसी इंडिया मासिक पत्रिका अक्‍टूबर 2012 अंक में

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/12/2012.html  भूल कर भी कोई भूल हो न ! : जनसत्‍ता वार्षिकांक दीपावली 2012 में प्रकाशित

http://avinashvachaspatinetwork.blogspot.in/2012/12/2012.html भूल कर भी कोई भूल हो न ! : जनसत्‍ता वार्षिकांक दीपावली 2012 में प्रकाशित

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