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शहीद शिरोमणि मंगल पाण्डे जी के बलिदान दिवस पर श्री परमधाम परिवार उन्हे कोटि-कोटि श्रद्धांजलि देता है|

शहीद शिरोमणि मंगल पाण्डे जी के बलिदान दिवस पर श्री परमधाम परिवार उन्हे कोटि-कोटि श्रद्धांजलि देता है|

मृत्यु निश्चित है जीवन का सबसे बड़ा सच है कि ‘ मृत्यु निश्चित है’ एक दिन सभी ने जाना है, जो मनुष्य संसार में आया है उसे एक दिन जाना ही है।  चन्द्रमोहन

मृत्यु निश्चित है जीवन का सबसे बड़ा सच है कि ‘ मृत्यु निश्चित है’ एक दिन सभी ने जाना है, जो मनुष्य संसार में आया है उसे एक दिन जाना ही है। चन्द्रमोहन

दहेज लेना छोड़ दे, ना मांगे तू भीख, बिन दहेज ब्याह कर, इंसान बनना सीख|

दहेज लेना छोड़ दे, ना मांगे तू भीख, बिन दहेज ब्याह कर, इंसान बनना सीख|

रोगी  रक्त लेते समय अपने ग्रुप का खून मांगता हैं, अपनी जाति-बिरादरी  का क्यों नहीं ?

रोगी रक्त लेते समय अपने ग्रुप का खून मांगता हैं, अपनी जाति-बिरादरी का क्यों नहीं ?

हिन्द प्राचीनकाल से ही हिन्द का अपना वैभव व गौरव रहा है। परमात्मा ने जब संसार की रचना की तो उसने हिन्द को पूजा का कमरा बनाया। जिस प्रकार मनुष्य अपने घर का निर्माण करता है तो उसमें बैड रुम, गेस्ट रुम, बाथ रुम, किचन इत्यादि बनाता है और उसी में एक कमरा पूजा का भी बनाता है। इसी प्रकार परमात्मा ने इस पृथ्वी पर हिन्द को पूजा के एक कमरे की तरह बनाया।  चन्द्रमोहन

हिन्द प्राचीनकाल से ही हिन्द का अपना वैभव व गौरव रहा है। परमात्मा ने जब संसार की रचना की तो उसने हिन्द को पूजा का कमरा बनाया। जिस प्रकार मनुष्य अपने घर का निर्माण करता है तो उसमें बैड रुम, गेस्ट रुम, बाथ रुम, किचन इत्यादि बनाता है और उसी में एक कमरा पूजा का भी बनाता है। इसी प्रकार परमात्मा ने इस पृथ्वी पर हिन्द को पूजा के एक कमरे की तरह बनाया। चन्द्रमोहन

तीन प्रकार के शिष्य            एक बार एक संत अपने शिष्यों से वार्ता कर रहे थे। वह बता रहे थे कि शिष्य कितने प्रकार के होते हैं। वह तीन प्रकार की मूर्तियों के उदाहरण से इस बात को समझा रहे थे। उन्होंने तीन मूर्तियाँ अपने शिष्यों के सामने रखी और इनकी पहचान करने को कहा। तीनों मूर्तियाँ बाहर से देखने में एक जैसी थी, इन्हें देखकर पहचान पाना बड़ा ही कठिन था।  चन्द्रमोहन

तीन प्रकार के शिष्य एक बार एक संत अपने शिष्यों से वार्ता कर रहे थे। वह बता रहे थे कि शिष्य कितने प्रकार के होते हैं। वह तीन प्रकार की मूर्तियों के उदाहरण से इस बात को समझा रहे थे। उन्होंने तीन मूर्तियाँ अपने शिष्यों के सामने रखी और इनकी पहचान करने को कहा। तीनों मूर्तियाँ बाहर से देखने में एक जैसी थी, इन्हें देखकर पहचान पाना बड़ा ही कठिन था। चन्द्रमोहन

मित्रता करने के लिये सोच को महत्व दो, व्यक्तित्व को नहीं

मित्रता करने के लिये सोच को महत्व दो, व्यक्तित्व को नहीं

बेटी हुयी तो छाती पीटी, बेटा पाकर फूल गये । वंश चले न बिन बेटी के, शायद ये तुम भूल गये ।।

बेटी हुयी तो छाती पीटी, बेटा पाकर फूल गये । वंश चले न बिन बेटी के, शायद ये तुम भूल गये ।।

https://www.youtube.com/watch?v=qLoBD9E5xQ8&list=UUV-h_GNoChgBK7HwMfGIixQ

https://www.youtube.com/watch?v=qLoBD9E5xQ8&list=UUV-h_GNoChgBK7HwMfGIixQ

"मनुष्य की दो महत्वपूर्ण आवश्यकताएं - स्वास्थ्य और सुरक्षा"         स्वास्थ्य के लिये- अन्तः पूजा जरुरी है ।     सुरक्षा के लिये जाति रहित एकजुटता जरुरी है।

"मनुष्य की दो महत्वपूर्ण आवश्यकताएं - स्वास्थ्य और सुरक्षा" स्वास्थ्य के लिये- अन्तः पूजा जरुरी है । सुरक्षा के लिये जाति रहित एकजुटता जरुरी है।

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