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जो चाहोगे सो पाओगे एक साधु था वह रोज घाट के किनारे बैठ कर चिल्लाया करता था जो चाहोगे सो पाओगे जो चाहोगे सो पाओगे। बहुत से लोग वहाँ से गुजरते थे पर कोई भी उसकी बात पर ध्यान नहीँ देता था और सब उसे एक पागल आदमी समझते थे। एक दिन एक युवक वहाँ से गुजरा और उसने उस साधु की आवाज सुनी जो चाहोगे सो पाओगे जो चाहोगे सो पाओगे। और आवाज सुनते ही उसके पास चला गया। उसने साधु से पूछा -“महाराज आप बोल रहे थे कि ‘जो चाहोगे सो पाओगे’ तो क्या आप मुझको वो दे सकते हो जो मैं जो चाहता हूँ?…