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#Odissi dance represent the culture and heritage of #Odisha, Have you ever seen it?......#SwostiHotels: http://www.swostihotels.com/

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विनय पत्रिका_हनुमत स्तुति (गोस्वामी तुलसीदास लिखित) :- मंगल-मूरति मारुत-नंदन I सकल-अमंगल-मूल-निकंदन II १ II  पवनतनय संतन-हितकारी I हृदय बिराजत अवध-बिहारी II २ II  मातु-पिता, गुरु, गनपति, सारद I सिवा-समेत संभु, सुक, नारद II ३ II  चरन बंदि बिनवौं सब काहू I देहु रामपद-नेह-निबाहू II ४ II  बंदौं राम-लखन-बैदेही I जे तुलसीके परम सनेही II ५ II  भावार्थ :- पवनकुमार श्रीहनुमानजी कल्याणकी मूर्ति हैं I वे सारी बुराइयोंकी जड़ काटनेवाले हैं II १ II पवनके पुत्र हैं, संतोंका हित करनेवाले हैं I अवधविहारी…

विनय पत्रिका_हनुमत स्तुति (गोस्वामी तुलसीदास लिखित) :- मंगल-मूरति मारुत-नंदन I सकल-अमंगल-मूल-निकंदन II १ II पवनतनय संतन-हितकारी I हृदय बिराजत अवध-बिहारी II २ II मातु-पिता, गुरु, गनपति, सारद I सिवा-समेत संभु, सुक, नारद II ३ II चरन बंदि बिनवौं सब काहू I देहु रामपद-नेह-निबाहू II ४ II बंदौं राम-लखन-बैदेही I जे तुलसीके परम सनेही II ५ II भावार्थ :- पवनकुमार श्रीहनुमानजी कल्याणकी मूर्ति हैं I वे सारी बुराइयोंकी जड़ काटनेवाले हैं II १ II पवनके पुत्र हैं, संतोंका हित करनेवाले हैं I अवधविहारी…

BHAGAVAD GITA {11 , 54}  भक्त्या त्वनन्यया शक्य अहमेवंविधोऽर्जुन ।  ज्ञातुं द्रष्टुं च तत्वेन प्रवेष्टुं च परन्तप ॥  However, through single-minded devotion alone, I can be seen in this form, can be known in essence, and also can be reached, O Arjuna. (11.54)

BHAGAVAD GITA {11 , 54} भक्त्या त्वनन्यया शक्य अहमेवंविधोऽर्जुन । ज्ञातुं द्रष्टुं च तत्वेन प्रवेष्टुं च परन्तप ॥ However, through single-minded devotion alone, I can be seen in this form, can be known in essence, and also can be reached, O Arjuna. (11.54)

Sri Rama Sugunadhama

Saraswati -- the Goddess of arts, education, learning, wisdom and excellence.

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