जबीन ए रंज़िश पुख़्ता तो हो ,

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जबीन ए रंज़िश पुख़्ता तो हो , गोया हम जिगर की ख़ाक़ नज़र कर देगे । दिल ए नादान की गुस्ताखियों को बेवज़ह ज़ाया न करना , वो चिलमन की ओट से

जबीन ए रंज़िश पुख़्ता तो हो , गोया हम जिगर की ख़ाक़ नज़र कर देगे । दिल ए नादान की गुस्ताखियों को बेवज़ह ज़ाया न करना , वो चिलमन की ओट से

जबीन ए रंज़िश पुख़्ता तो हो , गोया हम जिगर की ख़ाक़ नज़र कर देगे । दिल ए नादान की गुस्ताखियों को बेवज़ह ज़ाया न करना , वो चिलमन की ओट से

जबीन ए रंज़िश पुख़्ता तो हो , गोया हम जिगर की ख़ाक़ नज़र कर देगे । दिल ए नादान की गुस्ताखियों को बेवज़ह ज़ाया न करना , वो चिलमन की ओट से

जबीन ए रंज़िश पुख़्ता तो हो , गोया हम जिगर की ख़ाक़ नज़र कर देगे । दिल ए नादान की गुस्ताखियों को बेवज़ह ज़ाया न करना , वो चिलमन की ओट से

जबीन ए रंज़िश पुख़्ता तो हो , गोया हम जिगर की ख़ाक़ नज़र कर देगे । दिल ए नादान की गुस्ताखियों को बेवज़ह ज़ाया न करना , वो चिलमन की ओट से

जबीन ए रंज़िश पुख़्ता तो हो , गोया हम जिगर की ख़ाक़ नज़र कर देगे । दिल ए नादान की गुस्ताखियों को बेवज़ह ज़ाया न करना , वो चिलमन की ओट से

जबीन ए रंज़िश पुख़्ता तो हो , गोया हम जिगर की ख़ाक़ नज़र कर देगे । दिल ए नादान की गुस्ताखियों को बेवज़ह ज़ाया न करना , वो चिलमन की ओट से

जबीन ए रंज़िश पुख़्ता तो हो , गोया हम जिगर की ख़ाक़ नज़र कर देगे । दिल ए नादान की गुस्ताखियों को बेवज़ह ज़ाया न करना , वो चिलमन की ओट से

जबीन ए रंज़िश पुख़्ता तो हो , गोया हम जिगर की ख़ाक़ नज़र कर देगे । दिल ए नादान की गुस्ताखियों को बेवज़ह ज़ाया न करना , वो चिलमन की ओट से

तू नज़रों का तजस्सुस का तू ही दिल की जुस्तजू , क़यामत तेरा तग़ाफ़ुल जब भी हो रूबरू । गर्म रेत् पर होती नहीं है खाली वादे वफ़ा की सुर्खियाँ ,

तू नज़रों का तजस्सुस का तू ही दिल की जुस्तजू , क़यामत तेरा तग़ाफ़ुल जब भी हो रूबरू । गर्म रेत् पर होती नहीं है खाली वादे वफ़ा की सुर्खियाँ ,

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