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ये ज़ौक़ ए शायरी ही है,

poetry
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ये ज़ौक़ ए शायरी ही है जो रातों को तन्हा सोने नहीं देती , गोया कौन कमबख्त जागता है तन्हा इश्क़ में बर्बादियों के बाद। ज़ौक़ ए इश्क़ गुलों में

ये ज़ौक़ ए शायरी ही है जो रातों को तन्हा सोने नहीं देती , गोया कौन कमबख्त जागता है तन्हा इश्क़ में बर्बादियों के बाद। ज़ौक़ ए इश्क़ गुलों में

ये ज़ौक़ ए शायरी ही है जो रातों को तन्हा सोने नहीं देती , गोया कौन कमबख्त जागता है तन्हा इश्क़ में बर्बादियों के बाद। ज़ौक़ ए इश्क़ गुलों में

ये ज़ौक़ ए शायरी ही है जो रातों को तन्हा सोने नहीं देती , गोया कौन कमबख्त जागता है तन्हा इश्क़ में बर्बादियों के बाद। ज़ौक़ ए इश्क़ गुलों में

ये ज़ौक़ ए शायरी ही है जो रातों को तन्हा सोने नहीं देती , गोया कौन कमबख्त जागता है तन्हा इश्क़ में बर्बादियों के बाद। ज़ौक़ ए इश्क़ गुलों में

ये ज़ौक़ ए शायरी ही है जो रातों को तन्हा सोने नहीं देती , गोया कौन कमबख्त जागता है तन्हा इश्क़ में बर्बादियों के बाद। ज़ौक़ ए इश्क़ गुलों में

ये ज़ौक़ ए शायरी ही है जो रातों को तन्हा सोने नहीं देती , गोया कौन कमबख्त जागता है तन्हा इश्क़ में बर्बादियों के बाद। ज़ौक़ ए इश्क़ गुलों में

ये ज़ौक़ ए शायरी ही है जो रातों को तन्हा सोने नहीं देती , गोया कौन कमबख्त जागता है तन्हा इश्क़ में बर्बादियों के बाद। ज़ौक़ ए इश्क़ गुलों में

ये ज़ौक़ ए शायरी ही है जो रातों को तन्हा सोने नहीं देती , गोया कौन कमबख्त जागता है तन्हा इश्क़ में बर्बादियों के बाद। ज़ौक़ ए इश्क़ गुलों में

ये ज़ौक़ ए शायरी ही है जो रातों को तन्हा सोने नहीं देती , गोया कौन कमबख्त जागता है तन्हा इश्क़ में बर्बादियों के बाद। ज़ौक़ ए इश्क़ गुलों में

ये ज़ौक़ ए शायरी ही है जो रातों को तन्हा सोने नहीं देती , गोया कौन कमबख्त जागता है तन्हा इश्क़ में बर्बादियों के बाद। ज़ौक़ ए इश्क़ गुलों में

ये ज़ौक़ ए शायरी ही है जो रातों को तन्हा सोने नहीं देती , गोया कौन कमबख्त जागता है तन्हा इश्क़ में बर्बादियों के बाद। ज़ौक़ ए इश्क़ गुलों में

ये ज़ौक़ ए शायरी ही है जो रातों को तन्हा सोने नहीं देती , गोया कौन कमबख्त जागता है तन्हा इश्क़ में बर्बादियों के बाद। ज़ौक़ ए इश्क़ गुलों में

ये ज़ौक़ ए शायरी ही है जो रातों को तन्हा सोने नहीं देती , गोया कौन कमबख्त जागता है तन्हा इश्क़ में बर्बादियों के बाद। ज़ौक़ ए इश्क़ गुलों में