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वादों की दलीलों के ,

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वादों की दलीलों के यूँ दायरे में न जा , चेहरे बदल रहा है हर रोज़ आइना नया नया । नस्तर चुभो रही है ज़ालिम तेरी निगाह , नासूर सवालों के लाज़िम

रूहानी दायरों से होकर कभी गुज़रों नासेह , ज़ख़्मी रूहों की तल्खियां तुमको भी सुनायी दें । उतारने पड़ते हैं सफ़ीने बहते दरिया में , यूँ किनारो

वादों की दलीलों के यूँ दायरे में न जा , चेहरे बदल रहा है हर रोज़ आइना नया नया । नस्तर चुभो रही है ज़ालिम तेरी निगाह , नासूर सवालों के लाज़िम

वादों की दलीलों के यूँ दायरे में न जा , चेहरे बदल रहा है हर रोज़ आइना नया नया । नस्तर चुभो रही है ज़ालिम तेरी निगाह , नासूर सवालों के लाज़िम

वादों की दलीलों के यूँ दायरे में न जा , चेहरे बदल रहा है हर रोज़ आइना नया नया । नस्तर चुभो रही है ज़ालिम तेरी निगाह , नासूर सवालों के लाज़िम