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वो आलम ए आरा ये अज़ीम ए आराइश ,

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ज़मीन ए ज़र्द थीं खूँ से लथपथ , जबीन ए ख़ाक थे अपने मैं खुद की मौत से डर कर नींद भर सोया नहीं । दर्द तेरे छालों के भी कम न थे , ज़ख्म जब

वो आलम ए आरा ये अज़ीम ए आराइश , पुराने अलविदा तुझको नए की जश्न ए फरमाइश । फिरदौस ए चमन से बहारें नदारद हैं , सर्द मौसम के झोकों ने

वो आलम ए आरा ये अज़ीम ए आराइश , पुराने अलविदा तुझको नए की जश्न ए फरमाइश । फिरदौस ए चमन से बहारें नदारद हैं , सर्द मौसम के झोकों ने

वो आलम ए आरा ये अज़ीम ए आराइश , पुराने अलविदा तुझको नए की जश्न ए फरमाइश । फिरदौस ए चमन से बहारें नदारद हैं , सर्द मौसम के झोकों ने