Shambhu Shankar Namah Shivaya  ना आदि ना अंत है उसका वो सब का ना इनका उनका वही शून्य है वही इकाय जिसके भीतर बसा शिवाय आंख मूंदकर देख रहा है साथ समय के खेत रहा है महादेव महा एकाकी जिसके लिए जगत है झांकी राम भी उसका रावण उसका जीवन उसका मरण भी उसका तांडव है और ध्यान भी वो है अज्ञानी का ज्ञान भी वो है इसको कांटा लगे न कंकर रण में रूद्र घरों में शंकर अंत यही सारे विघ्नों का इस भोले का वार भयंकर वही शून्य है वही इकाय जिसके भीतर बसा शिवाय

Shambhu Shankar Namah Shivaya ना आदि ना अंत है उसका वो सब का ना इनका उनका वही शून्य है वही इकाय जिसके भीतर बसा शिवाय आंख मूंदकर देख रहा है साथ समय के खेत रहा है महादेव महा एकाकी जिसके लिए जगत है झांकी राम भी उसका रावण उसका जीवन उसका मरण भी उसका तांडव है और ध्यान भी वो है अज्ञानी का ज्ञान भी वो है इसको कांटा लगे न कंकर रण में रूद्र घरों में शंकर अंत यही सारे विघ्नों का इस भोले का वार भयंकर वही शून्य है वही इकाय जिसके भीतर बसा शिवाय

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