Shri Paramhans Ashram

After 5200 years long interval, Srimad Bhagavad Gita in its authentic and everlasting exposition: Swami Shri Adgadanand Ji Maharaj.
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Guru Purnima : सती अनुसुइया आश्रम में पूज्य गुरु महाराज से भाविक श्रद्धालु कहते थे कि महाराज, हमें मंत्र दे दो। गुरु महाराज कहते थे - ‘‘हो, मैं कान न फूँकिहौं, उपदेश देइहौं। सुनो और पालन करो। भगवान के एक छोटे से नाम ओम् अथवा राम का जाप करो। चलते-फिरते, उठते-बैठते, खाना खाते-पानी पीते, खुरपी चलाते, नौकरी करते... हर परिस्थिति में भगवान का नाम याद आया करे। सुबह-शाम बैठकर नाम जपने में आधा-एक घण्टा समय अवश्य देना चाहिए। - Swami Adgadanand

Guru Purnima : सती अनुसुइया आश्रम में पूज्य गुरु महाराज से भाविक श्रद्धालु कहते थे कि महाराज, हमें मंत्र दे दो। गुरु महाराज कहते थे - ‘‘हो, मैं कान न फूँकिहौं, उपदेश देइहौं। सुनो और पालन करो। भगवान के एक छोटे से नाम ओम् अथवा राम का जाप करो। चलते-फिरते, उठते-बैठते, खाना खाते-पानी पीते, खुरपी चलाते, नौकरी करते... हर परिस्थिति में भगवान का नाम याद आया करे। सुबह-शाम बैठकर नाम जपने में आधा-एक घण्टा समय अवश्य देना चाहिए। - Swami Adgadanand

Guru Purnima - भजन की विधि जानने के लिए हमारा एक ही संदेश है कि गीताभाष्य ‘यथार्थ गीता’ का स्वयं अध्ययन करें और इसे जन-जन तक पहुँचायें। गुरु पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर सभी शिष्यों एवं श्रद्धालुजनों को गुरुदेव भगवान की कृपा से शुभ आशीर्वाद, फलें एवं फूलें। Srimad Bhagavad Gita - Yatharth Geeta, Swami Adgadanand

Guru Purnima - भजन की विधि जानने के लिए हमारा एक ही संदेश है कि गीताभाष्य ‘यथार्थ गीता’ का स्वयं अध्ययन करें और इसे जन-जन तक पहुँचायें। गुरु पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर सभी शिष्यों एवं श्रद्धालुजनों को गुरुदेव भगवान की कृपा से शुभ आशीर्वाद, फलें एवं फूलें। Srimad Bhagavad Gita - Yatharth Geeta, Swami Adgadanand

Discourse of Swami Ji on Bhakti. Excerpts from the Life of Markandey Rishi and Rishyasringa (Shring-rishi);  Lord Rama and Sant Shabri; and Swami Paramanand Ji Maharaj (Swami Paramhans Ji) at Village Katesar, Varanasi, Uttar Pradesh – Dated – 29th May, 2012.   #Bhakti #Quote #MarkandeyRishi #Rishyasringa #Shringrishi #LordRama #Shabri #Paramanand #Paramhans #Bhagavadgita #YatharthGeeta #SwamiAdgadanand

Discourse of Swami Ji on Bhakti. Excerpts from the Life of Markandey Rishi and Rishyasringa (Shring-rishi); Lord Rama and Sant Shabri; and Swami Paramanand Ji Maharaj (Swami Paramhans Ji) at Village Katesar, Varanasi, Uttar Pradesh – Dated – 29th May, 2012. #Bhakti #Quote #MarkandeyRishi #Rishyasringa #Shringrishi #LordRama #Shabri #Paramanand #Paramhans #Bhagavadgita #YatharthGeeta #SwamiAdgadanand

श्रीकृष्ण जिस स्तर की बात करते हैं, क्रमश: चलकर उसी स्तर पर खड़ा होनेवाला कोई महापुरुष ही अक्षरश: बता सकेगा कि श्रीकृष्ण ने जिस समय गीता का उपदेश दिया था, उस समय उनके मनोगत भाव क्या थे? मनोगत समस्त भाव कहने में नहीं आते। कुछ तो कहने में आ पाते हैं, कुछ भाव-भंगिमा से व्यक्त होते हैं और शेष पर्याप्त क्रियात्मक हैं– जिन्हें कोई पथिक चलकर ही जान सकता है। जिस स्तर पर श्रीकृष्ण थे, क्रमश: चलकर उसी अवस्था को प्राप्त महापुरुष ही जानता है कि गीता क्या कहती है।

श्रीकृष्ण जिस स्तर की बात करते हैं, क्रमश: चलकर उसी स्तर पर खड़ा होनेवाला कोई महापुरुष ही अक्षरश: बता सकेगा कि श्रीकृष्ण ने जिस समय गीता का उपदेश दिया था, उस समय उनके मनोगत भाव क्या थे? मनोगत समस्त भाव कहने में नहीं आते। कुछ तो कहने में आ पाते हैं, कुछ भाव-भंगिमा से व्यक्त होते हैं और शेष पर्याप्त क्रियात्मक हैं– जिन्हें कोई पथिक चलकर ही जान सकता है। जिस स्तर पर श्रीकृष्ण थे, क्रमश: चलकर उसी अवस्था को प्राप्त महापुरुष ही जानता है कि गीता क्या कहती है।

‘‘धोबिया जल बिच मरत पियासा’’ - यहाँ संत कबीर ने साधक को धोबी की संज्ञा दी, जो अपने जन्म-जन्मांतरों के दागों की धुलाई स्वयं करने में समर्थ है। ब्रह्म उसी के हृदय में है। भक्तिरूपी जल भी उसके हृदय में है। जल के बीच में भी वह प्यासा है। उसकी विधि संतों के पास है। विषयोन्मुख मन को वे प्रभु की ओर उन्मुख कर देते हैं। - स्थान: वाराणसी, दिनांक: २७-०२-२०११ Excerpts from #SantKabir, #SwamiParamanand, #SwamiParamhans, #BhagavadGita, #GoswamiTulsidas, #Ramcharitmanas, #YatharthGeeta.

‘‘धोबिया जल बिच मरत पियासा’’ - यहाँ संत कबीर ने साधक को धोबी की संज्ञा दी, जो अपने जन्म-जन्मांतरों के दागों की धुलाई स्वयं करने में समर्थ है। ब्रह्म उसी के हृदय में है। भक्तिरूपी जल भी उसके हृदय में है। जल के बीच में भी वह प्यासा है। उसकी विधि संतों के पास है। विषयोन्मुख मन को वे प्रभु की ओर उन्मुख कर देते हैं। - स्थान: वाराणसी, दिनांक: २७-०२-२०११ Excerpts from #SantKabir, #SwamiParamanand, #SwamiParamhans, #BhagavadGita, #GoswamiTulsidas, #Ramcharitmanas, #YatharthGeeta.

प्रश्न है कि हिन्दू-धर्म क्या है, हमारी निजी पहचान क्या है, हम हिन्दू क्यों है,धर्म हमें देता क्या है,जिसका प्रचार-प्रसार किया जाये? आवश्यकता है की उसको पहचान के रूप में धर्मशास्त्र प्रदान किया जाये| धर्मशास्त्र वही जो लिखा हो अनादि काल से और गीता ही धर्मशास्त्र है|  #BhagavadGita #Krishna #Religion #Dharma #Spiritual

प्रश्न है कि हिन्दू-धर्म क्या है, हमारी निजी पहचान क्या है, हम हिन्दू क्यों है,धर्म हमें देता क्या है,जिसका प्रचार-प्रसार किया जाये? आवश्यकता है की उसको पहचान के रूप में धर्मशास्त्र प्रदान किया जाये| धर्मशास्त्र वही जो लिखा हो अनादि काल से और गीता ही धर्मशास्त्र है| #BhagavadGita #Krishna #Religion #Dharma #Spiritual

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